Monday, 26 August 2019

खामोश रहते हैं - Sp Rediwala

मैं हूं ना पसंद सबको
बहुत बोलता हूं सब कहते हैं,

चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।

ये दर्द-ए-ग़म जिंदगी का हिस्सा है
तो क्यों ना इन्हें हंसकर सहते हैं,

चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।

जो समझता ही नहीं क्यों समझाए उसे
ना जिक्र करते हैं ना उसका नाम लेते हैं,

चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।

दुनिया की तरह पत्थर करते हैं दिल को
रेत के बने मकान तो अक्सर ढ़हते हैं,

चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।

ये जो आंसू है इन पर भरोसा क्यों करें
ये तो खुशी और गम दोनों में बहते हैं,

चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।
चलो कुछ दिन खामोश रहते हैं।।।

      -Sp Rediwala

Wednesday, 21 August 2019

Sp Rediwala Shayari

धीरे-धीरे जिंदगी खत्म हो रही है
 बातें होती है अब भी पर कम हो रही है।।

मैं खुद से कहता हूं जरूरत नहीं उसकी
फिर ना जाने क्यों आंखें नम हो रही है।।

उसे चाहने की जी भर के देखने की 
गया है वो जबसे ख्वाहिशें दफन हो रही है।।
जब रहता था यार यहां आ जाते थे हम
अब निकालो  इस गली से घुटन हो रही है।।

          -  Sp Rediwala

Sp Rediwala Beautiful Poetry

मेरे हालात और जज्बातों का मजाक उड़ा रहे हैं
ये जो लोग मेरी शायरियों पर तालियां बजा रहे हैं,

मैं चाहता हूं ठोकर खा कर फिर से संभलना
पर ना जाने क्यों ये मेरे रास्ते से पत्थर हटा रहे हैं।

मेरे किए एहसानों का कोई जिक्र नहीं जुबां पर
मैं जब से आया हूं मुझे मेरी गलतियां बता रहे हैं।

वो जो ना आया था ना आया है ना आएगा कभी
ना जाने क्यों ये मेरी गलियों को इतना सजा रहे हैं।

ये हैं मोहब्बत कुछ अपनों की दिल धड़क रहा मेरा
मैं मर  गया हूं कब का ये मुझे जिंदा बता रहे हैं।।।
                  -Sp Rediwala